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जय जिनेंद्र

जियो और जीने दो
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पूज्य गुरुदेव श्री प्रबल सागर जी मुनिराज स्वाध्याय करते हुए...



पूज्य गुरुदेव श्री प्रबल सागर जी मुनिराज स्वाध्याय करते हुए...


गुरुदेव हम सभी आपके शीघ्र स्वस्थ होने की मंगल कामना करते है !!

!! जयकारा गुरुदेव का जय जय गुरुदेव !! 

Namokar Mantra



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Share As Much As Possible:- ~~~~~~~~~~~~~~~~~~ माना ये सभी व्यक्ति ऐसे उग्र, अशिक्षित, असभ्य, बे-दिमाग अ-मानवीय... नहीं होते है, मगर जो होते है उनकी यहाँ बात की जा रही है... ------------------------------------------------------------- ये कहते है ये देश जितना हमरा है उतना ही इनका है- ठीक है ये कहते है- आजादी के लड़ाई में बराबर शामिल थे- ठीक है .. ये कहते है- हमारी देशभक्ति पे शक न करे - ठीक है... मगर.. यह उचित नहीं है ... :-( हम शांति प्रिया हैं,फिर भी ये हमारे साथ ऐसा कर रहे है. हद होती है, किसी चीज की, ये बे-शर्मो की तरह सब कुछ करते रहे.. और हम अभी-भी चुप... मगर अब यहाँ नहीं रुका तो, हम चुप नहीं रहेंगे. अब बहुत हो चुका गुंडा राज...!! :-( :-( इसे जिनता हो सके उतना "(Share)शेयर" करें ।।। जय जिनेन्द्र !! जय भारत !!

‎"Lays चिप्स के पैकेट में जो E631 लिखा है वह दर असल सूअर की चर्बी है। चाहो तो गूगल पर देख लो।



"Lays चिप्स के पैकेट में जो E631 लिखा है वह दर असल सूअर की चर्बी है। चाहो तो गूगल पर देख लो।
गब्बर की यही चीख भरी आवाज़ मेरे ज़हन में आई जब आज दोपहर आया एक एस एम एस पढ़ा मैंने, जो मेरे एक सहयोगी द्वारा भेजा गया था। SMS का संदेश था कि "Lays चिप्स के पैकेट में जो E631 लिखा है वह दर असल सूअर की चर्बी है। चाहो तो गूगल पर देख लो। " कमाल है ! शायद ही कोई भारतीय परिवार चिप्स आदि से बच पाया होगा!! मुझे तत्काल कुछ वर्षों पहले का वह समय या...द आने लगा जब MSG का पता चलने पर मैं हर स्टोर पर किसी खाद्य पदार्थ के पैकेट पर नज़रें गड़ा कर यह देखने लगा जाता था कि इसमे कहीं MSG तो नहीं। यह देख वहां का स्टाफ व्यंग्य भरी नज़रें लिए बताता था कि ये सस्ता है सर, ज़्यादा महंगा नहीं है! मै जब कहता कि कीमत नहीं देख रहा हूँ तो उनकी जिज्ञासा बढ़ती तब बताता कि यह क्या होता है। आजकल तो बड़े बड़े अक्षरों में खास तौर पर लिखा रहता है कि No MSG ऐसा ही कुछ वाकया ब्रुक बोंड की चाय-पत्ती के साथ हुआ था जिस पर पोस्ट लिखी थी मैंने कि किस तरह इतनी बड़ी कम्पनी लोगों को सरासर बेवकूफ बना रही है। बात हो रही E631 की। मैं दन्न से बाज़ार गया और Lays के पैकेट देखे कुछ नहीं दिखा। लेकिन मुझे याद आने लग पड़ा था कि इस तरह के कोड देखें हैं मैंने कुछ दिन पहले। शहर के दूसरे कोने वाल़े एक सुपर बाज़ार में भी कुछ नहीं दिखा तो स्टोर वालों से इस बारे में बात करने पर ज्ञात हुआ कि कुछ सप्ताह पहले आयातित चिप्स और बिस्किट लाए गए थे जो अब ख़त्म हो चुके। तब तक एक जिज्ञासु कर्मचारी कहीं से दो ऐसे पैकेट ले आया जिन्हें चूहों द्वारा कुतरे जाने पर अलग रख दिया गया था। उन में इस तरह के कोड थे जिस में वाकई 631 लिखा हुआ है अब मैंने गूगल की शरण ली तो पता चला कि कुछ अरसे पहले यह हंगामा पाकिस्तान में हुआ था जिस पर ढेरों आरोप और सफाइयां दस्तावेजों सहित मौजूद हैं । हैरत की बात यह दिखी कि इस पदार्थ को कई देशों में प्रतिबंधित किया गया है किन्तु अपने देश में धड़ल्ले से उपयोग हो रहा। मूल तौर पर यह पदार्थ सूअर और मछली की चर्बी से प्राप्त होता है और ज्यादातर नूडल्स, चिप्स में स्वाद बढाने के लिए किया जाता है। रसायन शास्त्र में इसे Disodium Inosinate कहा जाता है जिसका सूत्र है C10H11N4Na2O8P1 होता यह है कि अधिकतर (ठंडे) पश्चिमी देशों में सूअर का मांस बहुत पसंद किया जाता है। वहाँ तो बाकायदा इसके लिए हजारों की तादाद में सूअर फार्म हैं। सूअर ही ऐसा प्राणी है जिसमे सभी जानवरों से अधिक चर्बी होती है। दिक्कत यह है कि चर्बी से बचते हैं लोग। तो फिर इस बेकार चर्बी का क्या किया जाए? पहले तो इसे जला दिया जाता था लेकिन फिर दिमाग दौड़ा कर इसका उपयोग साबुन वगैरह में किया गया और यह हिट रहा। फिर तो इसका व्यापारिक जाल बन गया और तरह तरह के उपयोग होने लगे। नाम दिया गया 'पिग फैट' 1857 का वर्ष तो याद होगा आपको? उस समयकाल में बंदूकों की गोलियां पश्चिमी देशों से भारतीय उपमहाद्वीप में समुद्री राह से भेजी जाती थीं और उस महीनों लम्बे सफ़र में समुद्री आबोहवा से गोलियां खराब हो जाती थीं। तब उन पर सूअर चर्बी की परत चढ़ा कर भेजा जाने लगा। लेकिन गोलियां भरने के पहले उस परत को दांतों से काट कर अलग किया जाना होता था। यह तथ्य सामने आते ही जो क्रोध फैला उसकी परिणिति 1857 की क्रांति में हुई बताई जाती है। इससे परेशान हो अब इसे नाम दिया गया 'ऐनिमल फैट' ! मुस्लिम देशों में इसे गाय या भेड़ की चर्बी कह प्रचारित किया गया लेकिन इसके हलाल न होने से असंतोष थमा नहीं और इसे प्रतिबंधित कर दिया गया। बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नींद उड़ गई। आखिर उनका 75 प्रतिशत कमाई मारी जा रही थी इन बातों से। हार कर एक राह निकाली गई। अब गुप्त संकेतो वाली भाषा का उपयोग करने की सोची गई जिसे केवल संबंधित विभाग ही जानें कि यह क्या है! आम उपभोक्ता अनजान रह सब हजम करता रहे।

बूचड़खाने हैं धरती के नर्क: मुनिश्री तरुणसागरजी


इंदौर. बूचड़खाने धरती के नर्क हैं। राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर और गांधी के देश में बूचड़खानों का होना भारत के माथे पर कलंक है। व्यापार में हिंसा एक बार क्षम्य हो सकती है लेकिन हिंसा का व्यापार कतई क्षम्य नहीं हो सकता। कत्लखाने खोलना हिंसा का व्यापार है।
उ.प्र. की मायावती सरकार नए बूचड़खाने खोलने की इजाजत देकर अहिंसा प्रेमियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। ऐसे में लोगों को अब तीर्थो पर जाने की जगह अल कबीर जैसे कत्लखानों के दर्शनार्थ जाना चाहिए। कत्लखानों के दृश्य देखकर शायद ही कोई मांसाहारी रह पाए। उक्त विचार मुनिश्री तरुणसागरजी ने सुभाष चौक स्थित जैन मंदिर में व्यक्त किए। वे उ.प्र. की मायावती सरकार द्वारा नए बूचड़खाने खोले जाने के विरोध में बोल रहे थे। 
                                                                              मुनिश्री तरुणसागरजी महाराज

JIV HATHYA ROKO




U.P. me ''15 katalkhane'' kholane ki permition 'MAYAVATI' NE DI HAI, JAHA 1 KHATLKHANE 

ME 1 DIN ME 10000 ANIMALS KO KATA JAEGA, 15 KATLKHANO ME 150000 JIVO KI 

HINSA HOGI JISKE VIRODH ME ME AGAR AAP JIV DAYA PREMI HAI TI IS MSG KO 

ITNA FELAO KI SABHI ISKE SUPORT MAY KHADE HO JAE OR MAYAVATI KI SARKAR 

JHUKNE PAR MAJBUR HO JAYE. *SABHI JIVO KI YEHI PUKAR* ''MAHAVIR KA 

SANDESH JIYO AUR JINE DO ''

JAI JINEDRA.
                                                                              मुनिश्री तरुणसागरजी महाराज

जैन समाज के सामने सबसे बड़ी चुनोती है

 " आज जैन समाज के सामने अपने को शाकाहारी बनाये रखने की सबसे बड़ी चुनोती है | 
 

महावीर के मोक्ष के बाद इन २५०० वर्षो मई जैन समाज कई बार बटा है | और बटवारा कभी दिगम्बर जैन -श्वेताम्बर जैन 
 

के नाम से तो कभी तेरापंथी जैन - बीसपंथी जैन के नाम से हुआ है | मगर अब जो बटवारा होगा वह दिगम्बर जैन -
 

श्वेताम्बर जैन , तेरापंथी जैन - बीसपंथी जैन , स्थानकवासी जैन और मंदिरमार्गी जैन जैसे नाम से नहीं होंगा बल्कि
 

'शाहाकारी-  जैन 'और ' मान्शाहारी - जैन ' के नाम से होंगा | अगर ऐसा हुआ तो याद रखना महावीर हमें कभी क्षमा नहीं करेंगे | "

                                                    मुनिश्री तरुणसागरजी महाराज